नई दिल्ली/बीजिंग:
मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए चीन अब भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारने के पक्ष में नजर आ रहा है। चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने एक ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया है कि बीजिंग, भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों को पीछे छोड़कर सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाना चाहता है। यह संकेत दुनिया में बदलती रणनीतिक समीकरणों और एशिया में संतुलन बनाए रखने की चीनी मंशा को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु:
🔹 ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट:
चीनी सरकार के मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति है और मौजूदा परिदृश्य में चीन को उसके साथ प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
🔹 LAC विवाद की छाया:
हालांकि 2020 के बाद से भारत-चीन संबंधों में तनाव बना हुआ है, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि बीजिंग तनाव को कम करने और संवाद की बहाली के प्रयासों में दिलचस्पी दिखा रहा है।
🔹 ब्रिक्स और एससीओ जैसी संस्थाओं में सहयोग:
भारत और चीन दोनों ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और अन्य बहुपक्षीय मंचों का हिस्सा हैं। ऐसे मंचों पर मिलकर काम करने से आपसी भरोसा बढ़ाया जा सकता है।
🔹 चीन की रणनीतिक सोच में बदलाव:
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ टकराव के बीच चीन को यह समझ में आ रहा है कि भारत जैसे पड़ोसी देशों से खराब संबंध उसकी वैश्विक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय:
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह सोच सतही नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है। भारत भी यदि पारस्परिक सम्मान और सुरक्षा के आधार पर संवाद करता है, तो एशिया में स्थिरता कायम हो सकती है।
भारत-चीन संबंधों में नया मोड़ आ सकता है अगर दोनों देश पारस्परिक हितों और वैश्विक स्थिरता को प्राथमिकता दें। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कथित बदलाव केवल शब्दों तक सीमित रहता है या फिर जमीनी स्तर पर भी वास्तविक सुधार देखने को मिलता है।




