रूस में भारतीयों की भर्ती पर MEA की कड़ी चेतावनी, मॉस्को से कहा– तुरंत रोकी जाए यह प्रथा

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने रूस में भारतीय नागरिकों की भर्ती और उन्हें युद्धक्षेत्र में भेजे जाने की खबरों पर गंभीर चिंता जताई है। मंत्रालय ने कहा है कि इस मुद्दे को कई स्तरों पर रूसी अधिकारियों के साथ उठाया गया है और भारत ने स्पष्ट रूप से मॉस्को से आग्रह किया है कि ऐसी प्रथा को तुरंत समाप्त किया जाए। साथ ही, MEA ने भारतीय नागरिकों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि किसी भी तरह की सैन्य भर्ती या ऐसे रोजगार प्रस्ताव स्वीकार न करें क्योंकि यह राह “खतरों से भरी” है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावास और कौंसुलर अधिकारी प्रभावित नागरिकों तथा उनके परिवारों के संपर्क में हैं और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने परिवारों और नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी संदिग्ध नौकरी या एजेंट के झांसे में न आएं और यदि पहले से कोई फंस चुका है तो तुरंत भारतीय मिशन से संपर्क करें।

हरियाणा के फतेहाबाद समेत कुछ राज्यों से यह जानकारी सामने आई है कि छात्र या विजिटर वीज़ा पर रूस गए युवाओं को एजेंटों के जरिए वर्दी पहनाकर छोटे प्रशिक्षण के बाद युद्धक्षेत्र में भेज दिया गया। इन युवाओं ने वीडियो के जरिए अपने परिवारों से मदद की गुहार भी लगाई है। कई रिपोर्टों में भर्ती और फोर्स्ड डिप्लॉयमेंट के अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जिनमें कुछ ने 13 भारतीयों का जिक्र किया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह संख्या अलग बताई गई है। सरकार इन मामलों की जांच कर रही है और फंसे हुए नागरिकों की पहचान के लिए प्रयास तेज कर रही है।

केंद्र सरकार ने दोहराया है कि किसी भी भारतीय को विदेशी सेना में शामिल होना न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए खतरनाक है बल्कि यह राष्ट्रीय हित और मानवीय दृष्टिकोण से भी गंभीर चिंता का विषय है। MEA का कहना है कि उसका मकसद नागरिकों को सुरक्षित रखना और परिवारों को हर संभव कांसुलर सहायता उपलब्ध कराना है। मंत्रालय ने सलाह दी है कि कोई भी भारतीय संदिग्ध रोजगार प्रस्तावों से दूर रहे और विदेश में फंसे हुए लोग तुरंत भारतीय मिशन से संपर्क करें।

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