नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट कहा है कि सड़क हादसों को रोकने के लिए बहुआयामी प्रयासों की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या को आधा करना है और इसके लिए ठोस रणनीतियाँ अपनाई जा रही हैं।
गडकरी ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 4.6 लाख सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें करीब 1.68 लाख लोगों की जान चली जाती है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित 18 से 35 वर्ष की युवा आबादी है। इन हादसों से न केवल परिवार उजड़ते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ता है। अनुमान के मुताबिक सड़क दुर्घटनाएँ भारत की GDP का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा गंवा देती हैं।
सड़क सुरक्षा के लिए मंत्री ने “चार E” रणनीति पर जोर दिया — इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ। उनका कहना है कि सड़क निर्माण और वाहन डिज़ाइन में सुधार के साथ-साथ यातायात नियमों का सख्ती से पालन और लोगों में जागरूकता फैलाना उतना ही ज़रूरी है। साथ ही, दुर्घटना के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना हजारों जानें बचा सकता है।
गडकरी ने यह भी स्वीकार किया कि देश में अधिकांश सड़क हादसों की जड़ में छोटे-छोटे इंजीनियरिंग दोष, खराब DPR और सड़क डिज़ाइन में लापरवाही होती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलतियों के लिए इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सड़क सुरक्षा को लेकर अपेक्षित सुधार संभव नहीं है।
सरकार ने इस दिशा में कई पहलें शुरू की हैं। हाल ही में Safety 2024 सम्मेलन में अगले पाँच वर्षों के लिए “Consensus Statement for Road Safety (2025–2030)” जारी किया गया, जिसमें शिक्षा, अवसंरचना सुधार और सख्त प्रवर्तन जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया। इसके साथ ही “Bharat New Car Assessment Programme (Bharat NCAP)” के जरिए वाहनों की सुरक्षा रेटिंग प्रणाली लागू की गई है, ताकि उपभोक्ता यह जान सकें कि उनका वाहन कितना सुरक्षित है। वहीं सड़क निर्माण में निवेश बढ़ाकर चिन्हांकन, संकेत और सड़क चौड़ीकरण जैसी कमियों को दूर करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि सिर्फ सरकारी पहल पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों का व्यवहार बदलना भी आवश्यक है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यातायात नियमों का पालन करें, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करें और शराब पीकर वाहन चलाने से बचें। उनके अनुसार, सड़क सुरक्षा सिर्फ एक तकनीकी या निर्माण का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे मानव जीवन, सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ विषय है।
नितिन गडकरी का यह संदेश स्पष्ट करता है कि सड़क सुरक्षा भारत की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा है। सरकार ने लक्ष्य तय कर दिया है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए जनता की भागीदारी, कड़ाई से नियमों का पालन और जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी होगा।




