बॉम्बे हाईकोर्ट में हड़कंप: ई-मेल से मिली धमकी, बम निरोधक दस्ता तैनात

SHARE:

मुंबई में शुक्रवार (12 सितंबर 2025) को बॉम्बे हाईकोर्ट में उस समय हड़कंप मच गया जब न्यायालय प्रशासन को एक संदिग्ध ई-मेल प्राप्त हुआ। इस ई-मेल में हाईकोर्ट परिसर में बम रखने की धमकी दी गई थी। जैसे ही यह सूचना सामने आई, अदालत की कार्यवाही रोक दी गई और कर्मचारियों, वकीलों तथा आगंतुकों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला गया। कुछ ही मिनटों में परिसर खाली कराकर चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया गया।

मुंबई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बम निरोधक दस्ते (BDS), एक्सप्लोसिव डिस्पोज़ल टीम (EOD) और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाया। हाईकोर्ट भवन की हर मंजिल, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग स्थल और परिसर के आसपास की गहन तलाशी शुरू कर दी गई। धातु डिटेक्टर और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु का तुरंत पता लगाया जा सके।

सूत्रों के अनुसार धमकी ई-मेल के जरिए दी गई थी, जिसे लेकर अब साइबर सेल जांच कर रही है। ई-मेल का स्रोत, आईपी एड्रेस और सर्वर की जानकारी खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संदेश किसी संगठित नेटवर्क से जुड़ा है या किसी शरारती तत्व की हरकत है। अब तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं।

इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इसलिए और बढ़ा दी है क्योंकि इसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट को भी धमकी भरा संदेश मिला था। दोनों घटनाओं को एक साथ देखने पर यह आशंका जताई जा रही है कि यह न्यायपालिका को डराने या बाधित करने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। यही वजह है कि पूरे देश के प्रमुख न्यायिक परिसरों में सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है।

मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र एटीएस, एनआईए और केंद्रीय एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। हाईकोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की सख्त तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल परिसर पूरी तरह सुरक्षा एजेंसियों के नियंत्रण में है और तलाशी अभियान जारी है।

पुलिस और प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। अदालत प्रशासन ने यह भी कहा है कि जिन मामलों की सुनवाई बाधित हुई है, उन्हें जल्द ही पुनर्निर्धारित कर संबंधित पक्षों को जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में बढ़ती फर्जी धमकियों के बावजूद हर संदेश को गंभीरता से लेना आवश्यक है क्योंकि ये घटनाएं न केवल न्यायपालिका के कामकाज को प्रभावित करती हैं बल्कि आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना भी पैदा करती हैं।

Leave a Comment