बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच सहमति बनने में लगातार देरी हो रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब खुद लालू प्रसाद यादव को सक्रिय होना पड़ा है। दरअसल, कांग्रेस और तेजस्वी यादव के बीच सीटों की संख्या और मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर विवाद अटक गया है, जिसे सुलझाने के लिए लालू प्रसाद ने मोर्चा संभाल लिया है।
तेजस्वी यादव ने हाल ही में कहा कि RJD 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इसका मतलब साफ है कि पार्टी सहयोगियों को सीमित सीटें ही देना चाहती है। दूसरी तरफ कांग्रेस लगभग 70 सीटों की मांग कर रही है, जिसमें कुछ ऐसी सीटें भी शामिल हैं जो परंपरागत रूप से RJD के प्रभाव वाले क्षेत्रों में आती हैं। कांग्रेस का तर्क है कि उसे सिर्फ “कमज़ोर” सीटों पर नहीं ठेला जाए, बल्कि उसे ऐसी जगह भी उतारा जाए जहाँ जीत की संभावना अधिक हो।
सीट बंटवारे की इस रस्साकशी में अब लालू प्रसाद यादव की एंट्री हुई है। स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय से राजनीति में उनकी सक्रियता कम हो गई थी, लेकिन मौजूदा विवाद को देखते हुए उन्होंने कांग्रेस नेताओं से संवाद बढ़ाया है। सूत्रों के मुताबिक, लालू ने कांग्रेस को सुझाव दिया है कि वह उम्मीदवारों की सूची पेश करे ताकि इस पर ठोस चर्चा हो सके।
इस विवाद का एक और अहम पहलू मुख्यमंत्री पद का चेहरा है। RJD स्पष्ट रूप से तेजस्वी यादव को गठबंधन का “स्वाभाविक नेता” मानती है और यही चाहती है कि उन्हें सीएम फेस घोषित किया जाए। लेकिन कांग्रेस इस पर अब तक सहमति नहीं जता पाई है। राहुल गांधी की चुप्पी से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी इस मुद्दे पर जल्दबाज़ी में निर्णय नहीं लेना चाहती। कांग्रेस का मानना है कि सीटों का बंटवारा पहले तय होना चाहिए और मुख्यमंत्री का सवाल बाद में उठाया जा सकता है।
महागठबंधन में केवल RJD और कांग्रेस ही नहीं, बल्कि CPI(ML), CPI, VIP और RLJP जैसे सहयोगी दल भी हैं, जिनकी अपनी-अपनी मांगें हैं। इन सबके बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। यदि कांग्रेस को पर्याप्त सीटें नहीं मिलतीं या मुख्यमंत्री पद पर सहमति नहीं बनती, तो गठबंधन में दरार पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति 2015 के महागठबंधन की याद दिलाती है, जब लालू प्रसाद यादव ने जेडीयू और कांग्रेस के बीच सीटों का संतुलन बनाकर चुनाव में बड़ी जीत दिलाई थी। इस बार भी सभी की निगाहें लालू पर हैं कि क्या वे अपने पुराने राजनीतिक कौशल से महागठबंधन को एकजुट रख पाएंगे या फिर सीट बंटवारे का यह विवाद गठबंधन की एकता पर भारी पड़ जाएगा।




