ओडिशा में पीएम मोदी का विकास धमाका: झारसुगुड़ा में करोड़ों की परियोजनाओं का उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2025 को ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले का दौरा किया और राज्य को करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने ₹60,000 करोड़ से अधिक की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें दूरसंचार, रेलवे, उच्च शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय स्वदेशी तकनीक से निर्मित 97,500 4G मोबाइल टावरों का उद्घाटन किया, जिनकी कुल लागत ₹37,000 करोड़ है। यह परियोजना विशेष रूप से दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाएगी।

रेलवे क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री मोदी ने ₹1,700 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इसमें प्रमुख परियोजनाओं के रूप में संभलपुर-सारला रेल फ्लाईओवर (₹273 करोड़), कोरापुट-बैगुड़ा रेल लाइन का दोहरीकरण (₹481 करोड़) और मनबर-कोरापुट-गोरापुर रेल लाइन (₹955 करोड़) शामिल हैं। इसके साथ ही, उन्होंने उधना (सूरत) और ब्रह्मपुर के बीच चलने वाली नई अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर परिचालन शुरू किया, जिससे गुजरात और ओडिशा के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा और दोनों राज्यों के व्यापार तथा यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ेगी।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने आठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के विस्तार की आधारशिला रखी। इस विस्तार से अगले चार वर्षों में 10,000 अतिरिक्त छात्रों के लिए सीटें उपलब्ध होंगी, जो राज्य और देश के तकनीकी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसके अलावा, झारसुगुड़ा हवाई अड्डे के विस्तार की घोषणा भी की गई, जिससे क्षेत्रीय हवाई संपर्क मजबूत होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। संभलपुर शहर में 5 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर भी ₹273 करोड़ की लागत से तैयार किया जाएगा, जो यातायात को सुगम बनाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ओडिशा के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल बुनियादी ढांचे, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और निवेश के अवसरों को भी बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से ओडिशा में औद्योगिक और तकनीकी विकास की गति तेज होगी और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।

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