लेह में चौथे दिन भी कर्फ्यू जारी, आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत

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लेह, लद्दाख – 27 सितंबर 2025: लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब हिंसा में बदल गया है। इस हिंसक घटना में चार लोगों की मौत हो गई और लगभग 70 लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों में तोड़फोड़ की, पुलिस वाहनों में आग लगाई और भाजपा कार्यालय तक को नुकसान पहुँचाया। पुलिस की कार्रवाई में कई लोग घायल हुए, जबकि चार लोगों की मौत हो गई।

हिंसा के बाद प्रशासन ने पूरे लेह जिले में कर्फ्यू लगा दिया है। उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बताया कि यह कदम शांति बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अब तक 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। गृह मंत्रालय की टीम ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों ने कहा कि स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी बनी हुई है। राशन, दूध और सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, इसलिए प्रशासन ने दिन में कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की योजना बनाई है ताकि लोग आवश्यक सामान खरीद सकें।

हिंसा के बाद आंदोलन के प्रमुख नेता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया और युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंसा से आंदोलन का उद्देश्य कमजोर होता है और केंद्र सरकार से लद्दाख की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उचित राजनीतिक समाधान निकालने की मांग की।

राजनीतिक दलों ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। भाजपा ने इसे कांग्रेस द्वारा प्रायोजित आंदोलन बताया है, जबकि कांग्रेस ने इसे लद्दाख की जनता की जायज़ मांग करार दिया। कांग्रेस नेता महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार को लद्दाख में अशांति के लिए जिम्मेदार ठहराया। केंद्र सरकार ने लद्दाख के नेताओं के साथ 6 अक्टूबर को वार्ता का प्रस्ताव रखा है, लेकिन स्थानीय नेताओं ने इसे अपर्याप्त बताते हुए जल्द समाधान की मांग की है।

लेह में जारी हिंसा और कर्फ्यू ने क्षेत्र की सामान्य जीवन व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। आवश्यक वस्तुओं की कमी और राजनीतिक तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अब यह देखने की जरूरत है कि केंद्र सरकार और स्थानीय नेता मिलकर इस संकट का समाधान कैसे निकालते हैं।

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