दिल्ली पुलिस ने खुद को साधु बताने वाले स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती की असलियत उजागर कर दी है। आगरा के एक होटल से पकड़े गए चैतन्यानंद पर शैक्षणिक संस्थान की छात्राओं के शोषण, वित्तीय गड़बड़ियों और फर्जी पहचान के जरिए रुतबा दिखाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
फर्जी पहचान के सहारे रुतबा दिखाने का खेल
पुलिस की छापेमारी में चैतन्यानंद के पास से संयुक्त राष्ट्र (UN), BRICS और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़े होने के फर्जी विजिटिंग-कार्ड और पहचान पत्र मिले। शुरुआती जांच में पता चला कि इन नकली कार्डों का इस्तेमाल वह समाज में प्रभाव जमाने और लोगों को प्रभावित करने के लिए करता था। इनमें दर्ज पद और पहचान किसी भी सरकारी अथवा अंतरराष्ट्रीय संस्था से मान्य नहीं हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरोपी इन्हें धोखाधड़ी के लिए उपयोग कर रहा था।
पासपोर्ट, पैन और मोबाइल भी बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से दो पासपोर्ट, दो पैन-कार्ड और कई मोबाइल फोन भी बरामद किए। आरोप है कि वह कई बार PMO से जुड़ा होने का दावा करके लोगों को फोन करवाता था और खुद को ऊँचे पद पर दिखाकर डराता-धमकाता था। इससे संबंधित कॉल-रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य की पड़ताल की जा रही है।
छात्राओं के शोषण के आरोप
चैतन्यानंद पर सबसे गंभीर आरोप वसंत कुंज स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट-रिसर्च (SRISIIM) से जुड़े हैं। आरोप है कि उसने संस्थान की कम से कम 17 छात्राओं को नौकरी और विदेश यात्रा का लालच देकर फंसाया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि साधु के रूप में पेश आने वाला यह व्यक्ति छात्राओं को अनुचित संदेश भेजता, देर रात बुलाता और अनुचित संबंध बनाने का दबाव डालता था। विरोध करने पर उन्हें धमकाया जाता और संस्थान से निकालने तक की चेतावनी दी जाती।
वित्तीय लेन-देन में भी गड़बड़ी
मामले में वित्तीय अनियमितताओं की भी आशंका जताई जा रही है। चैतन्यानंद द्वारा संचालित ट्रस्ट और संस्थान के खातों में संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है। पुलिस इन खातों की ऑडिट और फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रस्ट के पैसे का दुरुपयोग किस तरह किया गया।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
दिल्ली पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में डिजिटल फॉरेंसिक, बैंक लेन-देन और दस्तावेजों की सच्चाई की गहन जांच की जाएगी। आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड मांगा जाएगा, ताकि और जानकारी जुटाई जा सके।
समाज और संस्थानों की प्रतिक्रिया
इस मामले के सामने आने के बाद धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों में भी हलचल है। कई संस्थाओं ने कहा है कि यदि आरोपी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन किया जाएगा। पीड़ितों की सुरक्षा और न्याय के लिए महिला आयोग और अन्य इकाइयों से भी मदद मांगी जा रही है।
कानूनी पहलू
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी सरकारी और अंतरराष्ट्रीय पहचान-पत्र बनाना, उनका इस्तेमाल करना और प्रभाव के लिए धोखाधड़ी करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यदि यह साबित हो गया कि आरोपी ने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर छात्राओं का शोषण किया या धन की हेराफेरी की, तो उस पर कई संगीन धाराएँ लग सकती हैं।




