तमिलनाडु के करूर जिले में 27 सितंबर 2025 को अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेतरी कझागम (TVK) द्वारा आयोजित रैली में भगदड़ मचने से कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई और 51 अन्य घायल हो गए। यह घटना उस समय हुई जब विजय का काफिला निर्धारित समय से कई घंटे देर से पहुंचा, जिसके कारण भीड़ बेकाबू हो गई। घायलों में कई महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिन्हें सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इस घटना के बाद भाजपा के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के. अनमलाई ने डीएमके सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि रैली के लिए 10,000 लोगों की अनुमति दी गई थी, लेकिन वहां 27,000 से अधिक लोग इकट्ठा हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार ने विपक्षी दलों की रैलियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए, जबकि अपनी रैलियों के लिए पूरी पुलिस बल तैनात किया जाता है। अनमलाई ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से पीड़ितों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपए और घायलों को 1 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके अलावा, न्यायिक आयोग की स्थापना की गई है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुणा जगदीशन करेंगी, ताकि भगदड़ के कारणों की जांच की जा सके। विजय ने भी पीड़ितों के परिवारों के लिए 20 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा करते हुए कहा कि यह घटना उनके लिए अत्यंत दुखद है और वह पीड़ितों के परिवारों के साथ हैं।
करूर जिले के व्यापारी संघ ने इस घटना के विरोध में 28 सितंबर को जिलेभर में पूर्ण बंद की घोषणा की। संघ के अध्यक्ष ए.एम. विक्रमराजा ने इसे अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि यह घटना टाली जा सकती थी और सभी व्यापारियों से बंद में भाग लेने की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की, जबकि राष्ट्रपति ने इसे अत्यंत दुखद बताते हुए शोक व्यक्त किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना तमिलनाडु में राजनीतिक रैलियों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए आयोजकों को समय पर रैली स्थल पर पहुंचने, पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करने और भीड़ नियंत्रण के लिए उचित उपाय करने की आवश्यकता है। करूर भगदड़ ने तमिलनाडु की राजनीति में सुरक्षा और जिम्मेदारी के मुद्दे को फिर से प्रमुख बना दिया है और अब सभी राजनीतिक दलों और प्रशासन को मिलकर काम करने की जरूरत है।




