बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में टिकट बंटवारे को लेकर घमासान मचा हुआ है। भागलपुर से जदयू सांसद अजय मंडल ने पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जताते हुए इस्तीफे की पेशकश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि टिकट बंटवारे के दौरान उनकी राय नहीं ली गई और स्थानीय नेताओं की अनदेखी की जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखी है और संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं।
वहीं, गोपालपुर के जदयू विधायक गोपाल मंडल भी नाराज हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना देकर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं की मंशा उन्हें टिकट से वंचित करने की है। विधायक ने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे तो सुरक्षा कारणों से उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद उन्होंने सड़क पर गमछा बिछाकर धरना शुरू कर दिया और यह कहा कि जब तक उन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वह धरना जारी रखेंगे।
जदयू में टिकट बंटवारे को लेकर बढ़ती नाराजगी केवल अजय और गोपाल मंडल तक सीमित नहीं है। कुर्था क्षेत्र से जदयू के संभावित उम्मीदवार पप्पू वर्मा को टिकट दिए जाने के विरोध में पूर्व विधायक सत्यदेव सिंह की पत्नी रिंकू कुशवाहा भी मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गई हैं। उनका आरोप है कि पप्पू वर्मा को टिकट मिलने से स्थानीय नेताओं की अनदेखी हो रही है और इससे पार्टी में असंतोष फैल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ती नाराजगी और स्थानीय नेताओं की असहमति से जदयू की चुनावी रणनीति पर असर पड़ सकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे पार्टी में एकता बनाए रखने और सभी नेताओं के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए जल्द कदम उठाएं, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में जदयू सफलता हासिल कर सके।




