सीएम स्टालिन का केंद्र पर हमला: कहा — राज्यपालों के ज़रिये विपक्षी राज्यों में अराजकता फैलाने की कोशिश

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र विपक्ष शासित राज्यों में अपने राजनीतिक हित साधने के लिए राज्यपालों का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यपालों के जरिए राज्यों की चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने और संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। स्टालिन ने पूछा कि आखिर केंद्र यह क्यों चाहता है कि देश के राज्यों में राज्यपालों के माध्यम से अराजकता फैलाई जाए। उन्होंने कहा कि यह रवैया न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि देश के संघीय ढांचे को भी कमजोर करता है।

मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु विधानसभा में बोलते हुए राज्यपाल आर.एन. रवि के हालिया बयानों को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का काम केवल संवैधानिक दायरे में रहकर राज्य सरकार की सहायता करना है, लेकिन केंद्र द्वारा नियुक्त कुछ राज्यपाल खुलेआम राजनीतिक टिप्पणी कर रहे हैं, जिससे राज्य की स्वायत्तता पर चोट पहुंच रही है। विधानसभा में इस मुद्दे पर गर्मागर्म बहस हुई और सरकार ने संबंधित विधेयकों को राज्यपाल को दोबारा भेजने का निर्णय लिया। स्टालिन ने कहा कि यदि राज्यपाल संवैधानिक मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे, तो राज्य सरकार लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।

स्टालिन ने केंद्र पर यह भी आरोप लगाया कि वह शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में भेदभावपूर्ण नीतियाँ लागू कर रहा है। उनके अनुसार, केंद्र द्वारा अनुदान और योजनाओं में जानबूझकर देरी की जा रही है और कुछ मामलों में राज्यों को केंद्रीय शर्तें मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र की यह नीतियां राज्यों पर ‘एक भाषा, एक संस्कृति’ का एजेंडा थोपने की कोशिश हैं, जो भारत की विविधता और संविधान की भावना के खिलाफ हैं।

केंद्रीय नेताओं ने स्टालिन के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और अन्य बीजेपी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान के तहत काम कर रही है और राज्यपाल अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं। उनका कहना है कि स्टालिन राजनीतिक लाभ के लिए केंद्र पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद संघीय ढांचे और राज्यों की स्वायत्तता को लेकर लंबे समय से जारी टकराव का हिस्सा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु और केंद्र के बीच यह विवाद केवल राज्यपालों की भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि भाषा, शिक्षा, और सांस्कृतिक नीतियों को लेकर भी तनाव बना हुआ है। स्टालिन का बयान इस तनाव को और तेज करता दिख रहा है, जिससे आने वाले दिनों में केंद्र-राज्य संबंधों में और तल्खी देखने को मिल सकती है। विधानसभा की हालिया कार्यवाही और स्टालिन के बयान ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है, और यह टकराव अब राष्ट्रीय राजनीति में भी गूंजने लगा है।

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