India at UNSC: पश्चिम एशिया पर खुली बहस के लिए भारत ने रूस का आभार जताया, पी. हरीश बोले— संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का रास्ता

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की हालिया खुली बहस में भारत ने पश्चिम एशिया की जटिल और तनावपूर्ण स्थिति पर चर्चा आयोजित करने के लिए रूस का आभार प्रकट किया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने बैठक के दौरान अपने संबोधन में कहा कि यह चर्चा समय की मांग है, क्योंकि क्षेत्र में जारी संघर्ष ने मानवीय संकट को गहरा कर दिया है। उन्होंने रूस की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के मंच सभी सदस्य देशों को अपने विचार साझा करने और समाधान के लिए ठोस रास्ते तलाशने का अवसर देते हैं।

पी. हरीश ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत हमेशा से शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक वार्ता का समर्थन करता आया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संघर्ष का हल केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि संवाद, संयम और आपसी विश्वास से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थिति में असैन्य नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और मानवीय सहायता का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

भारत ने सुरक्षा परिषद से अपील की कि वह अपनी भूमिका को और सशक्त बनाए तथा संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए। पी. हरीश ने कहा कि सभी पक्षों को बंधकों की सुरक्षित रिहाई, राहत सामग्री की समय पर आपूर्ति और युद्धविराम की दिशा में ईमानदार प्रयास करने चाहिए। भारत ने यह भी दोहराया कि वह मानवीय सहायता और शांति प्रयासों में अपना योगदान जारी रखेगा।

रूस की अध्यक्षता में आयोजित इस बहस में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, मानवीय संकट, और सुरक्षा परिषद की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। रूस ने इस बैठक को आयोजित कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होने का अवसर दिया, जिसे भारत ने सराहनीय कदम बताया। भारत का यह रुख वैश्विक स्तर पर एक संतुलित, व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

इस बहस के माध्यम से भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह किसी भी क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में “संवाद और कूटनीति” को ही स्थायी समाधान का रास्ता मानता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहित सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी यह नीति दोहराई है कि शांति केवल तब संभव है जब सभी पक्ष आपसी सम्मान, सहयोग और मानवीय मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ें।

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