नई दिल्ली — भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही कूटनीतिक तनातनी के बाद अब संबंधों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक ने द्विपक्षीय रिश्तों में नई दिशा दी है। बैठक के बाद जारी साझा बयान में दोनों पक्षों ने यह स्पष्ट किया कि वे आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत करना चाहते हैं। इसी क्रम में भारत ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को नई दिल्ली में औपचारिक बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। यह कदम दोनों देशों के बीच संवाद बहाली और आर्थिक सहयोग को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, भारत का उद्देश्य कृषि क्षेत्र, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), ऊर्जा और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में कनाडा के साथ मिलकर सहयोग को बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बातचीत ठोस परिणामों में बदलती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिल सकती है। गौरतलब है कि 2023 में कनाडा में एक हिंसक घटना और उसके बाद लगाए गए आरोपों ने दोनों देशों के रिश्तों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। लेकिन 2025 में जापान में हुए जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री कार्नी की मुलाकात ने रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने की दिशा में पहला बड़ा कदम रखा।
कूटनीतिक स्तर पर भी हाल के दिनों में सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत अब कनाडा को अपनी राजनयिक टीम को 2024 के पूर्व स्तर पर बहाल करने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही वीज़ा सेवाओं और दूतावास संबंधी प्रक्रियाओं को सामान्य करने के प्रयास भी जारी हैं। इन कदमों से दोनों देशों के बीच लोगों-से-लोगों के संपर्क और व्यापारिक गतिविधियों को सहजता मिलने की उम्मीद है।
दोनों देशों ने आपसी सुरक्षा चिंताओं और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर विशेष ध्यान देने पर सहमति जताई है। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विज्ञान एवं तकनीक और कृषि आपूर्ति-शृंखला जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम करने की योजना बनाई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत-कनाडा संबंधों में यह “गर्माहट” तभी स्थायी रूप लेगी जब दोनों देश पारदर्शिता, आपसी विश्वास और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत अपने मतभेदों को सुलझाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा तय हो जाती है, तो यह दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। इससे न केवल द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आएगी, बल्कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा और प्रवासी भारतीयों से जुड़े सहयोग को भी नई दिशा मिलेगी।




