भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित 12वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ADMM-Plus) में भाग लेते हुए कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में आसियान (ASEAN) एक अनिवार्य हिस्सा है। यह बैठक 31 अक्टूबर 2025 को आयोजित की गई, जिसमें आसियान के 10 सदस्य देशों और भारत सहित 8 संवाद साझेदारों ने भाग लिया। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इस मंच का एक सक्रिय सदस्य रहा है और इसने भारत-आसियान के बीच रक्षा सहयोग को एक संगठित रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति केवल कूटनीतिक या आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, तकनीक, और मानव संसाधन विकास जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग को गहराई देने का प्रयास है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) को मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित बनाए रखना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दिशा में भारत समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में आसियान देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
राजनाथ सिंह ने बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत-आसियान के बीच रक्षा सहयोग न केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित होना चाहिए, बल्कि रक्षा उद्योग, अनुसंधान, और तकनीकी साझेदारी को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। भारत ने इस अवसर पर आसियान के साथ अपनी संयुक्त कार्य योजना (ASEAN-India Plan of Action) को 2026-2030 की अवधि के लिए आगे बढ़ाने की बात भी कही।
रक्षा मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि भारत और आसियान मिलकर एक डिफेंस थिंक-टैंक फोरम स्थापित करें, जो नीति निर्माण और सुरक्षा सहयोग के नए रास्ते सुझाए। यह फोरम हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों—जैसे समुद्री विवाद, आतंकवाद, साइबर खतरे और आपदा प्रबंधन—के समाधान में मददगार साबित होगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और आसियान के बीच बढ़ता सहयोग न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह साझा समृद्धि और विकास का भी प्रतीक है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत आने वाले समय में आसियान देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास, औद्योगिक सहयोग, और रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगा। इस बैठक में भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट संदेश दिया कि दक्षिण-पूर्व एशिया भारत की विदेश नीति का केंद्रबिंदु है और आसियान उसके लिए सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि ‘एक्ट ईस्ट नीति’ की आत्मा है।




