बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राज्य में आयोजित एक विशाल जनसभा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और महागठबंधन पर जोरदार हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने तेजस्वी यादव को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि राजद के पोस्टरों से कुछ नेताओं की तस्वीरें गायब हैं, जबकि कुछ की तस्वीरें इतनी छोटी कर दी गई हैं कि पहचानना मुश्किल हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “तेजस्वी जी, क्या अपने पिता का नाम छपवाने में शर्म आ रही है?” मोदी ने कहा कि यह वही दल है जो कभी ‘जंगलराज’ का प्रतीक रहा है, लेकिन अब उस दौर को खुद ही छिपाने की कोशिश कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि बिहार के लोग भलीभांति जानते हैं कि वह अंधकारमय दौर कैसा था, जब भ्रष्टाचार, अपराध और परिवारवाद का बोलबाला था। उन्होंने कहा कि महागठबंधन अब उस अतीत से दूरी बनाकर युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जनता सच्चाई जानती है। मोदी ने यह भी कहा कि “जो अपने अतीत से शर्मिंदा हो, वह राज्य का भविष्य नहीं बना सकता।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनावी माहौल में दोनों गठबंधनों के बीच तीखी बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार को लेकर विवादित टिप्पणियाँ किए जाने के बाद भाजपा लगातार आक्रामक रुख में है। मोदी के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक राजद के खिलाफ भाजपा की रणनीतिक चाल के रूप में देख रहे हैं, जिसका उद्देश्य विपक्ष के अतीत और नेतृत्व की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना है।
रैली में प्रधानमंत्री ने महागठबंधन पर जातिगत राजनीति और वोट बैंक के सहारे सत्ता पाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा विकास और स्थिरता की राजनीति करती है। उन्होंने जनता से अपील की कि बिहार को “पारिवारिक राजनीति” से मुक्त कर एक स्थायी और पारदर्शी सरकार को चुनें। मोदी की यह रैली चुनावी दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने अपने भाषण में भावनात्मक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर विपक्ष को घेरने की कोशिश की।




