अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल नवंबर में दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल न होने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि “दक्षिण अफ्रीका को इस मंच पर होना ही नहीं चाहिए”, क्योंकि उनके अनुसार उस देश की नीतियाँ और वर्तमान परिस्थितियाँ वैश्विक नेतृत्व के अनुकूल नहीं हैं। ट्रंप ने यह बयान अमेरिका के एक बिज़नेस फोरम में दिया, जहाँ उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की जमीन सुधार नीति और वहां की आर्थिक नीतियों पर भी तीखा हमला बोला। ट्रंप ने कहा कि वे इस देश को जी-20 जैसे वैश्विक निर्णय-निर्माण मंच का हिस्सा मानने से असहमत हैं और इसलिए सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे।
ट्रंप के इस बयान से अमेरिका-दक्षिण अफ्रीका संबंधों में पहले से मौजूद तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे ताकि देश की भागीदारी बनी रहे। वहीं, दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका देश किसी के दबाव में नहीं आएगा और जी-20 अध्यक्ष के रूप में वह अफ्रीका व वैश्विक दक्षिण के हितों को प्राथमिकता देगा। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि उनका एजेंडा “एकजुटता, समानता और सतत विकास” पर केंद्रित रहेगा और वे बाहरी आलोचनाओं के बावजूद अपनी नीतियों पर अडिग रहेंगे।
गौरतलब है कि इस वर्ष का जी-20 सम्मेलन 22 और 23 नवंबर 2025 को जोहानसबर्ग के नासरेक केंद्र, गौटेंग प्रांत में आयोजित किया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका इस बार जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है और उसने अपनी थीम “सॉलिडैरिटी, इक्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी” रखी है। सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता भाग लेंगे और वैश्विक आर्थिक, जलवायु एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक मंचों पर अमेरिका की भूमिका और उसकी कूटनीतिक नीति को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।




