बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का 89 वर्ष की आयु में निधन होने की खबर ने पूरे फिल्म जगत को गहरे शोक में डुबो दिया। सोमवार सुबह मिली इस सूचना के बाद मुंबई के विले पार्ले स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सनी देओल, बॉबी देओल से लेकर फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने नम आंखों से एक ऐसे कलाकार को विदाई दी, जिसने छह से अधिक दशकों तक भारतीय सिनेमा को अपनी बेहतरीन कलाकृतियों और अभिनय कौशल से समृद्ध किया।
धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के फगवाड़ा के पास नसराली गांव में हुआ था और उनका बचपन इन्हीं गलियों में बीता। उनके पिता गांव के स्कूल में शिक्षक थे, इसलिए बचपन सरल और अनुशासित माहौल में गुजरा। धर्मेंद्र ने कई बार अपने इंटरव्यू में यह बताया था कि फिल्मी दुनिया में आने का सपना उन्होंने बचपन में ही देख लिया था। बताया जाता है कि गांव में होने वाली रामलीला के दौरान उन्हें किसी प्रमुख किरदार का रोल नहीं मिला था, लेकिन मंच के पीछे खड़े होकर कलाकारों को अभिनय करते हुए देखने का वही अनुभव उनके भीतर अभिनय की चाह जगाने का कारण बना। उनके बचपन के दोस्तों ने भी कई दफा यह किस्सा साझा किया कि छोटे धर्मेंद्र उस समय किसी रोल से वंचित जरूर रहे, लेकिन कला के प्रति उनमें उमंग और लगन उसी समय से दिखाई देने लगी थी।
फगवाड़ा की कच्ची सड़कों, खेतों की पगडंडियों और स्थानीय मेलों-त्योहारों में सक्रिय भागीदारी ने धर्मेंद्र के व्यक्तित्व को जड़ों से जोड़े रखा। यही कारण था कि बड़े पर्दे पर सफलता की ऊंचाइयों को छूने के बावजूद उनकी सादगी और विनम्रता बरकरार रही। उन्हें दिलीप कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों की अदाकारी ने बेहद प्रभावित किया और फिल्मों में आने की प्रेरणा भी इन्हीं अभिनय-प्रतीकों से मिली। 1960 के दशक में जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, तो उनकी कड़ी मेहनत, मजबूत स्क्रीन प्रेज़ेंस और स्वाभाविक अभिनय ने उन्हें जल्द ही स्टार बना दिया। “फूल और पत्थर”, “सीता और गीता”, “शोले”, “चुपके चुपके”, “यकीन” और “यादों की बारात” जैसी फिल्में उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण हैं, जिनमें रोमांस, एक्शन, कॉमेडी—हर रंग में उन्होंने दर्शकों का दिल जीता।
धर्मेंद्र की सेहत पिछले कुछ महीनों से उतार-चढ़ाव से गुजर रही थी। उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया और परिवार की ओर से उनकी सेहत को लेकर सावधानी की अपील भी की गई थी। निधन से कुछ दिन पहले ही उन्होंने एक भावुक वीडियो संदेश साझा किया था, जिसे देखकर उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर ढेरों शुभकामनाएं भेजी थीं। सोमवार को मिली अंतिम खबर ने इन सभी उम्मीदों को खत्म कर दिया और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
आज धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक युग का नाम हैं—एक ऐसी पीढ़ी का कलाकार, जिसने बॉलीवुड को पहचान दिलाई और भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी। फगवाड़ा की मिट्टी से निकला यह सितारा भले आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी चमक, उसकी जिंदादिली और उसका काम आने वाली पीढ़ियों तक दर्शकों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी विरासत हमेशा बड़े पर्दे और करोड़ों दिलों में जीवित रहेगी।




