दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सायरिल रामाफोसा ने जोहानिसबर्ग में आयोजित IBSA (इंडिया–ब्राज़ील–दक्षिण अफ्रीका) नेताओं की बैठक में अपने संबोधन के दौरान कहा कि “हम जिस दुनिया में रह रहे हैं, वह नाटकीय ढंग से और बेहद तेज़ी से बदल रही है।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वैश्विक बदलावों के इस दौर में विकासशील देशों के सामने अवसर और चुनौतियाँ दोनों बढ़े हैं। रामाफोसा ने यह भी स्पष्ट किया कि IBSA जैसे मंच अब सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विश्व राजनीति और वैश्विक आर्थिक ढांचे में सुधार के उत्प्रेरक बनने की क्षमता रखते हैं।
इस बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इन्साइसियो लूला दा सिल्वा भी शामिल हुए। तीनों नेताओं ने वैश्विक व्यवस्था में समावेशिता और संतुलन बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य त्रिपक्षीय सहयोग को नई दिशा देना, दक्षिण-दक्षिण साझेदारी को मज़बूत करना और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद—में सुधार की दिशा में साझा आवाज़ उठाना था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में वैश्विक चुनौतियों, विशेषकर आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और असमान आर्थिक ढांचे पर प्रभावी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
IBSA देशों ने आर्थिक साझेदारी, डिजिटल अवसंरचना, जलवायु-लचीले कृषि समर्थन और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की रक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझावों पर चर्चा की। नेताओं ने यह भी माना कि एकतरफा व्यापारिक नीतियाँ और ज़बरदस्ती के उपाय विकासशील देशों के हितों के खिलाफ हैं। इसलिए, IBSA ने एक न्यायसंगत और पूर्वानुमेय वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान यह भी सहमति बनी कि तीनों देश तकनीकी सहयोग, सामाजिक विकास और स्टार्टअप–इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएँ तेज़ी से आगे बढ़ाएँगे।
बैठक के समापन पर जारी बयानों में कहा गया कि IBSA मंच को पुनर्जीवित करने की इस पहल से न केवल तीनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी, बल्कि इससे वैश्विक शासन में विकासशील देशों की आवाज़ भी अधिक प्रभावी होगी। रामाफोसा के अनुसार, दुनिया में हो रहे तेज़ बदलावों को देखते हुए IBSA को एकजुट होकर कार्य करना होगा, ताकि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण अपनाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका—तीनों लोकतांत्रिक और उभरती अर्थव्यवस्थाएँ—मिलकर वैश्विक परिदृश्य में नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।




