देश भर में संविधान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया, और इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक विस्तृत पत्र लिखकर भारतीय संविधान की महानता और उसकी परिवर्तनकारी शक्ति पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान ने भारत के हर नागरिक को अवसरों की समानता प्रदान की है और इसी संवैधानिक व्यवस्था की शक्ति ने एक साधारण परिवार से आने वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाया। उन्होंने संविधान को केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों का जीवंत दस्तावेज बताते हुए नागरिकों से अपील की कि वे राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ और देश के प्रति अपने संवैधानिक कर्तव्यों को प्राथमिकता दें। मोदी ने इसे “कर्तव्यप्रधान विकसित भारत” के निर्माण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया।
संसद भवन स्थित केंद्रीय कक्ष में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष एवं अन्य शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया और राष्ट्रपति ने संविधान के कई भाषाई संस्करणों को जारी किया। अपने संबोधन में उन्होंने देश की लोकतांत्रिक विरासत को मजबूत बनाए रखने और नागरिकों को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह में भारत के संवैधानिक इतिहास, मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के पत्र में 26 नवंबर 1949 की ऐतिहासिक स्मृति को भी उजागर किया गया जब संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया था। उन्होंने बताया कि 2015 में उनकी सरकार ने इस दिन को ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय इसलिए लिया ताकि देश की नई पीढ़ी को संविधान के महत्व और उसकी भावना से अवगत कराया जा सके। पीएम ने युवाओं और प्रथम मतदाताओं के लिए जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की सलाह दी और कहा कि आज लिए जाने वाले निर्णय आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देंगे, इसलिए हर नागरिक को देशहित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों में अग्रणी है और यह ताकत हमारे संविधान और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव हुई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे समाज और राष्ट्र के प्रति अपने योगदान को कर्तव्य के रूप में समझें और मिलकर एक ऐसा भारत बनाएँ जो न केवल समृद्ध और आधुनिक हो, बल्कि अपने संवैधानिक आदर्शों का भी सम्मान करे।




