प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में एक बार फिर देशवासियों से जोरदार अपील की कि वे “वोकल फॉर लोकल” — यानी लोकल उत्पादों, कारीगरों और छोटे-मध्यम उद्योगों — का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्थानीय विकास की दिशा वही है जहाँ हम अपने रोज़मर्रा के फैसलों में स्थानीय विकल्पों को प्राथमिकता दें। त्योहारों के अवसर हों या रोज़मर्रा की ज़रूरतें, स्वदेशी और स्थानीय वस्तुओं को अपनाना सिर्फ भावनात्मक समर्थन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूत करने की एक रणनीति है।
उन्होंने कहा कि विदेशों में भारत की छवि तब मजबूत होती है, जब हम अपने कारीगरों और स्थानीय ब्रांड्स की कला और मेहनत को सम्मान दें — उदाहरण के लिए, G-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए गए उपहारों में भी स्वदेशी हस्तशिल्प को प्रमुखता दी गई। ऐसे में जब दुनिया हमारे लोक-उत्पादों को पहचानती है, तो हमारा फर्ज बनता है कि हम उन्हें अपनी प्राथमिकता बनाएं। मोदी ने खासकर युवा पीढ़ी से कहा कि वे लोकल ब्रांड्स और स्वरोजगार को अपनाएँ, ताकि कारीगरों और छोटे उद्योगों को स्थायी समर्थन मिले।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में देश की कृषि, खाद्यान्न उत्पादन, खेल, अंतरिक्ष समेत अन्य क्षेत्रों में मिली उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये सफलताएँ उसी सहयोग और सामूहिक प्रयास का नतीजा हैं — जहां हर स्तर पर छोटे और बड़े योगदान ने मिलकर काम किया। उन्होंने कारीगरों, किसानों और उन आम नागरिकों को सलाम किया, जिनकी मेहनत ने इन उपलब्धियों को मुमकिन बनाया। उनका कहना था कि “लोकल को वोकल बनाना” यानि इन अछूतों परंपराओं और कारीगरी की कद्र करके, उन्हें राष्ट्रहित में शामिल करना है।
सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं — मोदी ने समाज-संगठनों, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों से भी आग्रह किया कि वे स्थानीय मेलों, शिल्प मेलों और ई-मार्केटप्लेस के माध्यम से कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए अवसर बढ़ाएं। उन्होंने नागरिकों से सुझाव दिया कि खासकर त्योहारों के समय, उपहार तथा उपयोग की चीज़ों में स्वदेशी विकल्प चुनें — इससे माँग बढ़ेगी, स्थानीय उद्योग मजबूत होंगे, और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
समाप्ति में प्रधानमंत्री ने यह विश्वास व्यक्त किया कि छोटे-छोटे रोज़मर्रा के चुनाव, चाहे वह लोकल खरीदारी हो या स्थानीय कारीगरों का समर्थन — मिलकर देश को एक बड़ी दिशा दे सकते हैं। उन्होंने हर परिवार, उपभोक्ता और समुदाय से कहा कि वे अपने स्तर पर योगदान दें, ताकि विकास सिर्फ शहरी केंद्रों तक न सीमित रहे, बल्कि हर गाँव, कस्बा और जिला भी इसके भागी बने — और “वोकल फॉर लोकल” को सिर्फ नारा न रहे, बल्कि ज़िंदगी की असली कारगुज़ारी बने।




