डिजिटल अरेस्ट घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, देशव्यापी जांच के निर्देश

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देशभर में डिजिटल अरेस्ट स्कैम तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें ठग लोग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश करते हैं। ये अपराधी फोन कॉल, वीडियो कॉल, ई‑मेल और फर्जी दस्तावेज़ दिखाकर पीड़ितों को डराते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे किसी गंभीर मामले में फंस गए हैं। इसके बाद, उन्हें बैंक खाते फ्रीज़ करने, सुरक्षा जमा या फाइन भरने के लिए मजबूर किया जाता है। इस तरह के फ्रॉड में अक्सर बुज़ुर्ग और तकनीक से कम परिचित लोग निशाने पर आते हैं। हाल के वर्षों में इस तरह के मामलों में लगभग ₹3,000 करोड़ से अधिक की ठगी सामने आई है, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को पहचानते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट न केवल नागरिकों के लिए वित्तीय खतरा है, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा और कानून के शासन को भी चुनौती देता है। अदालत ने CBI को देशभर में इन मामलों की प्राथमिक जांच करने का आदेश दिया है। इसके तहत बैंक अधिकारियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और राज्य सरकारों को निर्देशित किया गया है कि वे जांच में पूरी तरह सहयोग दें और अगर किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का उपयोग किया गया है तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी उपलब्ध कराएँ। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि बैंकिंग प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या जानबूझकर मदद मिली है, तो संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

इस स्कैम के कुछ बड़े मामले भी सामने आए हैं। मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक 76 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति को IPS और CBI अधिकारी बनकर ठगा गया और लगभग ₹76 लाख की ठगी की गई। हैदराबाद में 71 वर्षीय व्यक्ति से फर्जी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लगभग ₹1.92 करोड़ की ठगी हुई। भोपाल में एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर और उनके परिवार से भी लाखों रुपये की ठगी हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इन घटनाओं को “चौंकाने वाला” बताया और देशव्यापी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस आदेश से उम्मीद की जा रही है कि अब राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर इस फ्रॉड नेटवर्क का समन्वित रूप से भंडाफोड़ करेंगी। बैंक और टेलीकॉम कंपनियों की भी जवाबदेही तय होगी और आम नागरिकों के लिए जागरूकता बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ कानून और साइबर सुरक्षा दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते सभी संबंधित पक्ष सतर्क और सहयोगी बने रहें।

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