विदेश मंत्रालय (MEA) ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी ओमान यात्रा के दौरान भारत और ओमान के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA/मुक्त व्यापार समझौता) पर औपचारिक रूप से मुहर लग सकती है। MEA के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने वाली है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ इस समय अंतिम चरण में हैं। यदि सभी तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान इन पर हस्ताक्षर किए जाने की पूरी संभावना है।
विदेश मंत्रालय ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और ओमान के बीच राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है, जिससे इसका कूटनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। मंत्रालय के अनुसार, भारत और ओमान के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में संबंध पहले से ही मजबूत हैं और प्रस्तावित व्यापार समझौता इन रिश्तों को नई ऊंचाई देगा। MEA ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों की टीमें पिछले कुछ समय से समझौते के विभिन्न प्रावधानों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की ओमान यात्रा से पहले केंद्र सरकार की कैबिनेट ने इस मुक्त व्यापार समझौते को मंजूरी दे दी है, जिससे इसके जल्द लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। यह मंजूरी ऐसे समय में दी गई है जब दोनों देश आपसी व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसर तलाशने पर विशेष जोर दे रहे हैं। माना जा रहा है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को खाड़ी क्षेत्र में बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी, जबकि ओमान को भारत में निवेश और औद्योगिक साझेदारी के नए अवसर प्राप्त होंगे।
सरकारी आकलन के अनुसार, CEPA के लागू होने से द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोकेमिकल्स, बंदरगाह विकास तथा समुद्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा। ओमान को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक अहम रणनीतिक साझेदार माना जाता है और यह समझौता केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देगा।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान व्यापार समझौते के अलावा अन्य द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की ओमान यात्रा को भारत-ओमान संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।




