थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर फिर भड़की जंग, ट्रंप का युद्धविराम दावा बेअसर

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दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर जारी तनाव एक बार फिर हिंसक टकराव में बदल गया है। हालिया घटनाक्रम में थाई सेना ने विवादित सीमा क्षेत्रों में हवाई और तोपखाने की कार्रवाई तेज कर दी, जिससे कई इमारतें और एक महत्वपूर्ण पुल क्षतिग्रस्त होने की खबर है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही बमबारी और गोलाबारी से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर संघर्ष रोकने में सफलता हासिल कर ली है। ट्रंप के अनुसार, उनकी मध्यस्थता के बाद थाईलैंड और कंबोडिया युद्धविराम पर सहमत हो गए थे। हालांकि जमीनी हालात ने उनके इस दावे को गलत साबित कर दिया। ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद सीमा पर फिर से विस्फोटों और सैन्य हमलों की खबरें सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि किसी ठोस युद्धविराम पर अमल नहीं हो सका है।

कंबोडिया के अधिकारियों का आरोप है कि थाई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उसके सीमावर्ती प्रांतों में बम गिराए, जिनसे नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। कई रिहायशी और व्यावसायिक इमारतें तबाह हो गईं, जबकि एक पुल के क्षतिग्रस्त होने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। दूसरी ओर, थाईलैंड का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई जवाबी है और कंबोडियाई बलों की ओर से की गई उकसावे वाली गतिविधियों के कारण यह कदम उठाना पड़ा।

लगातार हो रही सैन्य झड़पों के चलते मानवीय संकट भी गहराता जा रहा है। सीमावर्ती गांवों और कस्बों से बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। राहत एजेंसियों के अनुसार, हजारों परिवार अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है। हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं, लेकिन मृतकों और घायलों की तादाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। क्षेत्रीय संगठनों और पड़ोसी देशों ने भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया है। हालांकि फिलहाल सीमा पर हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं और थाईलैंड-कंबोडिया विवाद एक बार फिर पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चुनौती बन गया है।

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