भारत-जॉर्डन सहयोग को नई दिशा, आतंकवाद-रोधी प्रयास होंगे मजबूत

SHARE:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जॉर्डन दौरे ने भारत–जॉर्डन संबंधों को नई मजबूती देने का काम किया है। अम्मान में जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद, कट्टरपंथ और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की सोच बिल्कुल साफ और अडिग है तथा इस चुनौती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट प्रयास जरूरी हैं। जॉर्डन ने भी भारत के इस रुख का समर्थन करते हुए आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त न करने की बात दोहराई।

वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेष रूप से गाजा और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मानवीय सहायता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी और राजा अब्दुल्ला ने इस बात पर सहमति जताई कि राजनीतिक संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही दीर्घकालिक समाधान संभव है, जबकि हिंसा और चरमपंथ किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकते।

भारत और जॉर्डन के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी बातचीत हुई। दोनों देशों ने आतंकवाद-रोधी तंत्र, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और कट्टरपंथ रोकने से जुड़े प्रयासों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह देश धार्मिक सहिष्णुता और मध्यमार्गी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक संदेश देता है।

इस दौरे के दौरान आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। भारत और जॉर्डन ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर सहमति जताई। इन पहलों से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई गति मिलने और आपसी लाभ के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी संवाद किया और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और जॉर्डन के रिश्ते आपसी सम्मान, साझा मूल्यों और शांति की प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। कुल मिलाकर, यह दौरा आतंकवाद के खिलाफ साझा संघर्ष, क्षेत्रीय स्थिरता और बहुआयामी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

Leave a Comment