विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने इज़राइल दौरे के दौरान वहां के शीर्ष नेतृत्व से अहम मुलाकातें कीं। उन्होंने इज़राइली विदेश मंत्री सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों से द्विपक्षीय बातचीत की, जिसमें भारत–इज़राइल संबंधों को और मज़बूत बनाने पर जोर दिया गया। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक रिश्तों की समीक्षा की गई और भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
वार्ता का प्रमुख विषय आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई रहा। डॉ. जयशंकर ने आतंकवाद के हर रूप की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारत और इज़राइल दोनों ही इस वैश्विक चुनौती से गंभीर रूप से प्रभावित रहे हैं। दोनों पक्षों ने आतंकवादी नेटवर्कों से निपटने के लिए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और आतंकवाद-रोधी क्षमता निर्माण को और मज़बूत करने पर सहमति जताई। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भी खास ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में पहले से चल रहे सहयोग को और आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। यह भी माना गया कि बदलते वैश्विक हालात में भारत और इज़राइल की रणनीतिक साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले। जयशंकर ने इज़राइली मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और नवाचार व स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग को प्रोत्साहित करने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने माना कि तकनीक, कृषि, जल प्रबंधन और रक्षा उद्योग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और गहराई दी जा सकती है, जिससे दोनों देशों को आर्थिक लाभ होगा।
इसके अलावा, क्षेत्रीय राजनीतिक हालात और पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से स्थिरता और शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कुल मिलाकर, डॉ. जयशंकर का यह इज़राइल दौरा आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख, रणनीतिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, जो भारत–इज़राइल संबंधों को और सुदृढ़ करेगा।




