लखनऊ, 19 दिसंबर 2025 — उत्तर प्रदेश में सामने आए जहरीले कफ सिरप (कोडीन-युक्त कफ सिरप) कांड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक जिन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है, उनके संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े माफियाओं से पाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरा नेटवर्क संगठित अपराध का हिस्सा है और सरकार इसकी जड़ तक जाकर कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में माफिया और अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि जहरीले कफ सिरप के अवैध निर्माण, भंडारण और तस्करी की शिकायतों के बाद यूपी पुलिस, एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि यह गिरोह फर्जी कंपनियों, नकली बिलों और झूठे दस्तावेजों के जरिए बड़े पैमाने पर कोडीन-युक्त सिरप की सप्लाई कर रहा था, जिसका दुरुपयोग नशे के तौर पर किया जा रहा था। इस अवैध कारोबार का असर न केवल युवाओं के स्वास्थ्य पर पड़ा, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बना।
सरकार की जांच में यह भी सामने आया है कि इस कांड में शामिल नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए थे। इसी को देखते हुए मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है, ताकि पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और राजनीतिक संरक्षण की गहराई से जांच की जा सके। कई फर्मों और संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और आगे भी कार्रवाई जारी है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की है। शुरुआती जांच में सैकड़ों करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन और हवाला नेटवर्क के संकेत मिले हैं। NDPS एक्ट के साथ-साथ कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, ताकि आरोपियों की अवैध संपत्तियों को जब्त किया जा सके और नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ा जा सके।
वहीं, मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। सपा नेताओं का कहना है कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए विपक्ष को निशाना बना रही है, जबकि भाजपा का दावा है कि जांच के तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।
कुल मिलाकर, जहरीले कफ सिरप कांड अब केवल आपराधिक या स्वास्थ्य से जुड़ा मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक सख्ती का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में SIT और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से यह साफ हो पाएगा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन जिम्मेदार हैं और किस स्तर तक राजनीतिक व आपराधिक गठजोड़ मौजूद था।




