सीरिया में अमेरिकी सैनिकों पर हालिया हमले के बाद अमेरिका ने ISIS के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर हवाई कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में 70 से अधिक आतंकवादी ठिकानों और अवसंरचनाओं को निशाना बनाया गया। 13 दिसंबर 2025 को पल्मायरा के पास अमेरिकी और सीरियाई सैनिकों पर एक ISIS समर्थक द्वारा किए गए हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी दुभाषिये की मौत हो गई थी, जबकि अन्य सैनिक घायल हुए थे। इस हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी थी और प्रशासन ने आतंकियों के खिलाफ प्रतिकारात्मक कार्रवाई की योजना बनाई।
अमेरिकी सेना ने 19 दिसंबर 2025 को “ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक” के तहत यह बड़ा अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में आतंकियों के अड्डे, हथियार भंडार, कमांड पोस्ट और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे निशाने पर आए। इसमें F-15 और A-10 लड़ाकू विमान, AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर और HIMARS रॉकेट सिस्टम जैसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि यह कार्रवाई युद्ध की शुरुआत नहीं बल्कि बदले की घोषणा थी, जिसका उद्देश्य ISIS की ताकत को कम करना और भविष्य के हमलों को रोकना है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ISIS पर बेहद गंभीर retaliation कर रहा है और जो भी अमेरिकियों को निशाना बनाएगा, उसे कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन को सीरिया सरकार का समर्थन प्राप्त है और आतंकवाद के खिलाफ दोनों पक्ष सहयोग कर रहे हैं। सीरिया की विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि वह अपने क्षेत्र में ISIS को कोई सुरक्षित जगह नहीं देने के लिए प्रतिबद्ध है और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगी।
पल्मायरा हमला और उसके बाद की अमेरिकी जवाबी कार्रवाई ने एक बार फिर से सिरियाई संघर्ष के जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य को उजागर किया है। इससे अमेरिका की मध्य पूर्व नीति, ISIS के बची‑खुची क्षमताओं का मुकाबला और सीरिया में स्थिरता की चुनौतियां नई बहस का विषय बन गई हैं।




