प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर को तोड़ने वाले आक्रांता इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गए हैं, लेकिन भारत की सभ्यता, संस्कृति और आस्था आज भी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की अमर आत्मा और अटूट विश्वास का प्रतीक है। हजार वर्षों के उतार-चढ़ाव, आक्रमणों और विनाश के प्रयासों के बावजूद सोमनाथ आज भी उसी गौरव के साथ खड़ा है और दुनिया को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि जिन लोगों ने सोमनाथ को नष्ट करने की कोशिश की थी, वे समय के साथ समाप्त हो गए, लेकिन यह मंदिर आज भी पूरी भव्यता के साथ खड़ा है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की आस्था को तलवार और हिंसा से कभी नहीं मिटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल ध्वंस की कहानी नहीं है, बल्कि यह पुनर्निर्माण, संकल्प और स्वाभिमान की महान गाथा है। यह मंदिर हमें सिखाता है कि कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आए, भारत की आत्मा को झुकाया नहीं जा सकता।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज भी कुछ विरोधी ताकतें भारत की संस्कृति और सभ्यता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने देशवासियों से सतर्क रहने और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया। मोदी ने कहा कि भारत की ताकत उसकी एकता, उसकी परंपराओं और उसकी आध्यात्मिक चेतना में है, जिसे कोई भी ताकत समाप्त नहीं कर सकती। सोमनाथ जैसे तीर्थस्थल हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और हमें यह याद दिलाते हैं कि हम एक महान सभ्यता के वारिस हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की यात्रा का भी उल्लेख किया और कहा कि स्वतंत्रता के बाद इस पवित्र धाम को दोबारा खड़ा करना केवल एक निर्माण कार्य नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र के आत्मसम्मान को फिर से स्थापित करने का संकल्प था। उन्होंने कहा कि आज सोमनाथ भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनकर पूरी दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि भारत कभी झुका नहीं, कभी टूटा नहीं और कभी मिटा नहीं।
अंत में पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उत्सव है। यह पर्व हमें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर नए भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ने का संदेश देता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली पीढ़ियां भी सोमनाथ से प्रेरणा लेकर देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करेंगी।




