नई दिल्ली, 12 जनवरी 2026: देशभर में आज स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान संत, विचारक और राष्ट्रप्रेरक को नमन करते हुए उनके विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ—आत्मविश्वास, सेवा, मानवता और राष्ट्रनिर्माण—आज भी युवाओं को दिशा देने का कार्य कर रही हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्वामी विवेकानंद को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे एक कालजयी दूरदर्शी और आध्यात्मिक प्रतीक थे, जिन्होंने युवाओं में आंतरिक शक्ति, कर्तव्यबोध और राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाई। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत के शाश्वत ज्ञान को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया और युवाओं को समाज व राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने कामना की कि उनके उपदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए निरंतर मार्गदर्शक बने रहें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वामी विवेकानंद को नमन करते हुए कहा कि उनके विचार युवा शक्ति में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि विवेकानंद का विश्वास था—युवा ही राष्ट्रनिर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर सेवा, अनुशासन और लक्ष्य-उन्मुख जीवन शैली को अपनाएँ, ताकि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकें।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। रामकृष्ण मठ और मिशन के केंद्रों पर विशेष पूजा-आरती, प्रार्थनाएँ और प्रेरक सभाएँ हुईं। शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने संगोष्ठियाँ, व्याख्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्वामी विवेकानंद के जीवन-दर्शन को युवाओं तक पहुँचाया। 12 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र-निर्माण और समाजसेवा के लिए प्रेरित करता है—और यही स्वामी विवेकानंद की सबसे बड़ी विरासत है, जो आज भी नए भारत के लिए उतनी ही प्रासंगिक है।




