तेहरान, 12 जनवरी 2026: ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश की सरकार और अमेरिका के बीच तनाव और गहराता जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को जानबूझकर बढ़ावा दिया गया ताकि अमेरिका को ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का बहाना मिल सके। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि वॉशिंगटन की नजर ईरान की अस्थिर स्थिति पर है और वह इसे अपने हितों के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।
विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पहले आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ थे, लेकिन बाद में इनमें हिंसा शामिल हो गई। उनका आरोप है कि इस हिंसा के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है, जो देश को अस्थिर करने और सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार स्थिति को नियंत्रण में रखने में सफल रही है और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन बाहरी हस्तक्षेप का खतरा अब भी बना हुआ है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर ईरानी प्रशासन ने जनता के खिलाफ हिंसा जारी रखी, तो अमेरिका हस्तक्षेप के विकल्पों पर विचार कर सकता है। ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने यह भी कहा है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर अमेरिका की नजर बनी हुई है और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
ईरान के भीतर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई शहरों में झड़पों, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आई हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों के मारे जाने और हजारों की गिरफ्तारी की खबरें हैं। सरकार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों में कई ऐसे तत्व शामिल हैं जो देश की संप्रभुता को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं, जबकि मानवाधिकार संगठन सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वह किसी भी विदेशी दखल को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी अखंडता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की गतिविधियों पर भी तेहरान की कड़ी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और अमेरिका के रुख से क्षेत्रीय हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।




