जापान के ऐतिहासिक शहर नारा में आयोजित शिखर सम्मेलन में जापान और दक्षिण कोरिया ने वर्षों पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए एक नई साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस सम्मेलन में जापान की प्रधानमंत्री और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने आपसी सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर सहमति जताई। दोनों देशों के नेताओं ने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक हालात में आपसी तालमेल समय की जरूरत है।
बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर विशेष जोर दिया गया। व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी। दोनों देशों का मानना है कि तकनीकी सहयोग से न केवल उनकी अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी स्थिरता आएगी।
शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा एक अहम मुद्दा रहा। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, चीन के बढ़ते प्रभाव और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक संतुलन को लेकर दोनों देशों ने साझा रणनीति पर चर्चा की। नेताओं ने माना कि मौजूदा हालात में जापान और दक्षिण कोरिया को एक-दूसरे के साथ खड़े होकर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना होगा।
इतिहास से जुड़े विवाद लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का कारण रहे हैं, लेकिन इस सम्मेलन में दोनों पक्षों ने अतीत की कड़वी यादों से आगे बढ़कर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया। नेताओं ने आपसी विश्वास बहाली और नियमित संवाद बढ़ाने पर सहमति जताई ताकि संबंधों में स्थायित्व और पारदर्शिता बनी रहे।
नारा शहर को सम्मेलन स्थल के रूप में चुनना भी प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि यह शहर एशियाई सभ्यता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। यह स्थान इस बात का संकेत देता है कि दोनों देश पुराने विवादों से ऊपर उठकर नई साझेदारी की नींव रखना चाहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन पूर्वी एशिया की राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है। अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया त्रिपक्षीय गठबंधन को मजबूती मिलने से क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को भी नया बल मिलेगा। नारा शिखर सम्मेलन ने यह साफ कर दिया है कि जापान और दक्षिण कोरिया अब टकराव नहीं बल्कि सहयोग की नीति के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।




