उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘प्रगति’ (Pro-Active Governance and Timely Implementation) मंच नए भारत की कार्यसंस्कृति का एक सशक्त और प्रभावी मॉडल बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह मंच केवल समीक्षा बैठक का माध्यम नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने का एक मजबूत प्लेटफॉर्म है, जिसने सरकारी कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी बैठकों में समस्याओं पर चर्चा अधिक होती थी, लेकिन प्रगति मंच के जरिए अब फोकस पूरी तरह समाधान पर केंद्रित हो गया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है और बड़ी-बड़ी विकास परियोजनाओं की नियमित निगरानी संभव हो पाई है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है और लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से देशभर की हजारों महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है, जिनकी कुल लागत लाखों करोड़ रुपये की है। इस मंच ने प्रशासनिक जकड़न को तोड़ते हुए निर्णय प्रक्रिया को तेज किया है और अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाया है। इससे शासन में पारदर्शिता बढ़ी है और जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिलने लगा है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रगति मंच ने “टीम इंडिया” की भावना को मजबूत किया है, जहां केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर विकास की दिशा में काम कर रही हैं। तकनीक आधारित यह मॉडल शासन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे न केवल विकास परियोजनाओं की गति बढ़ी है बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, नए भारत के निर्माण के लिए जिस कार्यसंस्कृति की आवश्यकता है, प्रगति मंच उसी का जीवंत उदाहरण है। यह मंच सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन का प्रतीक बन चुका है और आने वाले समय में देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




