भारत-सेशेल्स दोस्ती और गहरी: रक्षा, व्यापार और ब्लू इकोनॉमी पर बनी सहमति

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भारत और सेशेल्स के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के हालिया भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे आपसी सहयोग को नई दिशा और मजबूती मिली है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-सेशेल्स के रिश्ते अब केवल कूटनीतिक या पारंपरिक दोस्ती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये “जमीन, समुद्र और हवा” तीनों स्तरों पर लगातार मजबूत हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, शिक्षा और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्ग न केवल दोनों देशों, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी संदर्भ में Vision MAHASAGAR के तहत सहयोग को और गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

दौरे के दौरान भारत ने सेशेल्स के सामाजिक और आर्थिक विकास में साझेदार बनने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके तहत बुनियादी ढांचे, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, नवीकरणीय ऊर्जा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। भारत की ओर से सेशेल्स को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी, जिससे वहां के मानव संसाधन विकास को गति मिलेगी।

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की योजना है। समुद्री निगरानी, तटरक्षक सहयोग, रक्षा प्रशिक्षण और सूचना साझा करने जैसे विषयों पर बातचीत हुई। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

व्यापार और निवेश को लेकर भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, पर्यटन, ब्लू इकोनॉमी और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर संयुक्त रूप से काम करने की इच्छा जताई। इससे न केवल आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि रोजगार और विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।

कुल मिलाकर, यह दौरा भारत-सेशेल्स संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित हुआ है। कई MoU और सहयोगी पहलों के जरिए दोनों देशों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वे भविष्य में भी रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी को और व्यापक तथा मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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