नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थिति चिंताजनक है और इसका समाधान केवल संवाद, संयम और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान का पक्षधर रहा है तथा सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत की राह अपनाने की अपील करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और उसके भारत पर संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई। बैठक में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पश्चिम एशिया में मौजूद भारतीयों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराएं। सरकार ने यह आश्वासन भी दिया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए समुचित तैयारी की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र के प्रमुख नेताओं से भी बातचीत कर हालात पर चर्चा की। उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात करते हुए नागरिकों की सुरक्षा और तनाव कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व से भी संपर्क कर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सहयोग की बात की गई। भारत ने दोहराया कि वह शांति प्रयासों में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी काम करते हैं, इसलिए सरकार उनकी सुरक्षा और संभावित निकासी योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और किसी भी आपात स्थिति में भारतीय दूतावासों से संपर्क बनाए रखें। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भारतीयों की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।




