महंगाई और जियोपॉलिटिकल तनाव के चलते फेड ने दरों में बदलाव से किया इनकार

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अमेरिका के केंद्रीय बैंक Federal Reserve ने मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। 18 मार्च 2026 को हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में दरों को 3.5% से 3.75% के दायरे में ही बनाए रखा गया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से ईरान से जुड़े हालात, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहे हैं।

फेड के इस कदम के पीछे प्रमुख कारण बढ़ती महंगाई और ऊर्जा कीमतों में उछाल है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी संकेत दिया है कि इन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण महंगाई दोबारा बढ़ने का खतरा है, जिससे फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है।

फेड के ताजा अनुमान के अनुसार महंगाई दर करीब 2.7% रह सकती है, जो उसके 2% लक्ष्य से अधिक है। वहीं, रोजगार बाजार में भी कुछ सुस्ती के संकेत मिल रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंक के सामने चुनौती और बढ़ गई है। उसे एक ओर महंगाई को नियंत्रित करना है, तो दूसरी ओर आर्थिक वृद्धि और रोजगार को भी बनाए रखना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया के तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में फेड जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठाने के बजाय सतर्क रुख अपना रहा है और “वेट एंड वॉच” रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है।

फिलहाल संकेत यही हैं कि 2026 के दौरान परिस्थितियों के अनुसार सीमित दर कटौती संभव हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह महंगाई, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, फेड का यह फैसला दर्शाता है कि वह वैश्विक अस्थिरता के बीच संतुलित और सावधानीपूर्ण मौद्रिक नीति अपनाए हुए है।

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