देश में एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने घोषणा की है कि जो राज्य पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में तेजी दिखाएंगे, उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी आवंटन दिया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, के कारण एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है और इसका असर भारत के घरेलू बाजार पर भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
नई नीति के तहत केंद्र सरकार राज्यों को प्रोत्साहित करना चाहती है कि वे गैस पाइपलाइन बिछाने, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार और संबंधित मंजूरी प्रक्रियाओं को तेज और सरल बनाएं। इसके बदले उन्हें अतिरिक्त एलपीजी आवंटन का लाभ मिलेगा, जिससे उनके व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत मिल सकेगी। पहले जहां राज्यों को सीमित मात्रा में कमर्शियल एलपीजी मिलती थी, वहीं अब PNG नेटवर्क को बढ़ावा देने पर इस आपूर्ति में बढ़ोतरी संभव होगी।
सरकार ने इस योजना के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। राज्यों को जिला स्तर पर निगरानी समितियां बनानी होंगी, गैस परियोजनाओं के लिए समयबद्ध मंजूरी देनी होगी और एकल खिड़की प्रणाली लागू करनी होगी, ताकि परियोजनाओं में देरी न हो। इन मानकों के आधार पर ही अतिरिक्त एलपीजी आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।
वर्तमान स्थिति में सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है, जबकि होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों को सीमित आपूर्ति मिल रही है। ऐसे में PNG को एक दीर्घकालिक और स्थायी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सके। इसके साथ ही राज्यों को कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं और आम उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे घबराहट में अनावश्यक बुकिंग न करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल मौजूदा संकट से राहत दिलाएगा, बल्कि भविष्य में देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।




