ईसाई समुदाय के प्रमुख पर्व ईस्टर के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और समाज में शांति, एकता तथा भाईचारे को सुदृढ़ करने की अपील की। इस पावन मौके पर दोनों नेताओं ने अपने संदेशों के माध्यम से लोगों को मानवता, करुणा और आपसी सहयोग के मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि ईस्टर प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान का प्रतीक है, जो सत्य, प्रेम और क्षमा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने और दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने की सीख देता है। राष्ट्रपति ने देशवासियों से अपील की कि वे इस अवसर पर समाज में सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा दें तथा एक समावेशी और शांतिपूर्ण राष्ट्र के निर्माण में योगदान करें। उन्होंने यह भी कहा कि विविधता से भरे भारत में ऐसे त्योहार सामाजिक एकता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईस्टर के अवसर पर देशवासियों को बधाई देते हुए इसे आशा, नवजीवन और विश्वास का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि ईस्टर हमें कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सभी नागरिकों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की और कहा कि यह त्योहार समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और सौहार्द को और अधिक मजबूत करे।
ईस्टर ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवन की स्मृति में मनाया जाता है। यह पर्व 40 दिनों के लेंट (उपवास और प्रार्थना) के बाद आता है और ‘होली वीक’ के समापन का प्रतीक होता है। होली वीक के दौरान पाम संडे, गुड फ्राइडे और ईस्टर संडे जैसे महत्वपूर्ण दिन शामिल होते हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
देशभर में ईस्टर के अवसर पर चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और प्रेम, शांति तथा भाईचारे का संदेश साझा किया। इस तरह ईस्टर का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान करता है।




