पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच Israel Defense Forces (IDF) ने ईरान और लेबनान में व्यापक सैन्य कार्रवाई करते हुए 200 से अधिक ईरानी ठिकानों और 140 से ज्यादा Hezbollah के ठिकानों को निशाना बनाया है। इस बड़े हमले को मौजूदा ईरान-इस्राइल तनाव के दौरान अब तक की सबसे तीव्र और व्यापक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।
आईडीएफ के अनुसार, इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में उसके प्रभाव को सीमित करना है। हमलों के दौरान Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़े कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें हथियार भंडारण केंद्र, मिसाइल निर्माण और परीक्षण से जुड़े स्थल, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड कंट्रोल सेंटर शामिल बताए जा रहे हैं। इन ठिकानों को ईरान की सैन्य संरचना का अहम हिस्सा माना जाता है, जिन पर हमले से उसकी सामरिक क्षमता पर असर पड़ सकता है।
वहीं लेबनान में IDF ने हिजबुल्ला के खिलाफ भी बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में संगठन के प्रशिक्षण केंद्र, हथियार भंडार, रॉकेट लॉन्चिंग साइट्स और भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिजबुल्ला की विशेष इकाई ‘रदवान फोर्स’ के कई अहम ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे संगठन की संचालन क्षमता को नुकसान पहुंचा है। इस कार्रवाई को इस्राइल द्वारा अपनी उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में कई बार मिसाइल हमले, ड्रोन स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाइयां देखने को मिली हैं, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव इसी तरह जारी रहा, तो यह व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसमें लेबनान, सीरिया और अन्य पड़ोसी देश भी शामिल हो सकते हैं।
लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण आम नागरिकों पर भी इसका असर पड़ रहा है। कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है, जिससे विस्थापन और मानवीय संकट की स्थिति पैदा होने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालात को काबू में करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं, वरना आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।




