‘फंडिंग द अनफंडेड’ से आत्मनिर्भर भारत तक: मुद्रा योजना की बड़ी उपलब्धि

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वर्ष 2015 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने 11 साल पूरे कर लिए हैं और इस दौरान इसने देश के सूक्ष्म और लघु उद्यम क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने का काम किया है। “फंडिंग द अनफंडेड” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई इस योजना ने उन छोटे उद्यमियों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा, जिन्हें पहले आसानी से ऋण नहीं मिल पाता था। बीते एक दशक में यह योजना करोड़ों लोगों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का आधार बनी है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 57 करोड़ से अधिक ऋण खातों के जरिए करीब 40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज वितरित किया जा चुका है। यह न केवल देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में सफल रही है, बल्कि छोटे व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़कर रोजगार सृजन को भी गति दी है। योजना के अंतर्गत बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसे शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस जैसी श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि व्यवसाय के विभिन्न चरणों के अनुरूप सहायता मिल सके।

मुद्रा योजना का प्रभाव महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। कुल लाभार्थियों में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो यह दर्शाता है कि इस योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं को भी इस योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता मिली है, जिससे देश में नए उद्यमों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

योजना के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री ने इसकी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुद्रा योजना ने देश के युवाओं, महिलाओं और छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है। यह पहल लोगों को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने पिछले 11 वर्षों में देश की आर्थिक संरचना को जमीनी स्तर पर मजबूत किया है। आसान ऋण सुविधा, व्यापक पहुंच और उद्यमिता को बढ़ावा देकर इसने न केवल करोड़ों लोगों की आजीविका को सशक्त किया है, बल्कि भारत को एक आत्मनिर्भर और समावेशी अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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