कर्नाटक के मांड्या में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश को विकसित और सशक्त बनाने के लिए नागरिकों से नौ महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही पूरा हो सकता है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सबसे पहले जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पानी बचाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है, क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की, ताकि पर्यावरण को संरक्षित किया जा सके और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाई जा सके।
प्रधानमंत्री ने स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने पर बल देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक स्थानों और अपने आसपास के वातावरण को साफ रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” का समर्थन करते हुए लोगों से भारतीय उत्पादों को अपनाने का आग्रह किया, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिल सके। साथ ही उन्होंने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि लोग भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को करीब से समझ सकें और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।
कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती अपनाने की जरूरत बताई, जिससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। स्वास्थ्य के संदर्भ में उन्होंने मोटे अनाज (मिलेट्स) को आहार में शामिल करने और तेल के कम उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ रही बीमारियों से बचने के लिए संतुलित खानपान और फिटनेस बेहद जरूरी है, इसलिए योग, खेल और नियमित व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सेवा भाव को समाज की असली ताकत बताते हुए जरूरतमंदों की मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि देशवासी इन नौ संकल्पों को ईमानदारी और निरंतरता के साथ अपनाते हैं, तो भारत तेजी से एक स्वस्थ, स्वच्छ, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बन सकता है। प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल एक भाषण नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।




