BRICS मंच से भारत ने साधा संतुलन, समुद्री स्थिरता को बताया वैश्विक जरूरत

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नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने पश्चिम एशिया संकट, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लेकर स्पष्ट और मजबूत संदेश दिया। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव का असर केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि समुद्री व्यापार मार्गों में किसी भी प्रकार की रुकावट से वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकता है।

बैठक के दौरान भारत ने एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति पर भी अप्रत्यक्ष रूप से चिंता जताई। जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ लगाए जाने वाले “एकतरफा दंडात्मक कदम” विकासशील देशों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संकट का समाधान दबाव और प्रतिबंध नहीं बल्कि संवाद, कूटनीति और सहयोग के जरिए ही संभव है। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों की ओर संकेत थी, हालांकि भारत ने किसी देश का नाम नहीं लिया।

BRICS बैठक में गाजा युद्ध, ईरान संकट, लाल सागर में बढ़ते हमले और पश्चिम एशिया की अस्थिरता प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। ईरान ने बैठक में अमेरिका और इस्राइल की नीतियों की आलोचना करने की मांग की, जबकि UAE ने क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया। इन मतभेदों के बीच भारत ने संतुलित भूमिका निभाई और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच से भारत का यह संदेश केवल कूटनीतिक बयान नहीं बल्कि उसकी व्यापक रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है। भारत लगातार यह संकेत दे रहा है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए समुद्री मार्गों की स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण है। माना जा रहा है कि आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में भी पश्चिम एशिया और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा प्रमुख एजेंडा बना रहेगा।

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