भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक और द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में शुक्रवार को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की गई। प्रधानमंत्री Narendra Modi और साइप्रस के राष्ट्रपति Nikos Christodoulides के बीच हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा, शिक्षा और क्षेत्रीय सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस के संबंध “समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं” और दोनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा विश्वास तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की समानता इस साझेदारी को लगातार मजबूत बना रही है।
नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में आयोजित इस वार्ता में विदेश मंत्री S. Jaishankar, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फिनटेक, डिजिटल नवाचार, स्टार्टअप, साइबर सुरक्षा और रिसर्च जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने के विकल्पों पर भी चर्चा की गई।
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस 20 से 23 मई तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। यह उनकी वर्तमान पद पर पहली भारत यात्रा है और इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा जून 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम है। उल्लेखनीय है कि दो दशकों से अधिक समय बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने साइप्रस का दौरा किया था, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय माना गया।
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने 2025-2029 कार्ययोजना और संयुक्त घोषणा के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा भी की। इस योजना के तहत व्यापार, तकनीकी सहयोग, पर्यटन, शिक्षा, प्रत्यक्ष हवाई संपर्क और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दोनों पक्षों ने निवेश और व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा देने तथा यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और साइप्रस के संबंध लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक आधार पर टिके रहे हैं। भारत लगातार साइप्रस की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता रहा है, जबकि साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है। दोनों देश राष्ट्रमंडल के सदस्य भी हैं और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता आने वाले वर्षों में भारत-साइप्रस संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




