कांगो में इबोला फैलने की आशंका तेज, उपचार केंद्र में हमले के बाद WHO अलर्ट

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डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस संक्रमण को लेकर चिंता गहराती जा रही है। देश के पूर्वी हिस्से में स्थित एक इबोला उपचार केंद्र में आगजनी की घटना के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इलाज केंद्र में हमला होने और टेंटों में आग लगाए जाने के दौरान वहां भर्ती 18 संदिग्ध मरीज लापता हो गए, जिससे संक्रमण के समुदाय में फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यदि ये मरीज संक्रमित हुए और निगरानी से बाहर रहे, तो बीमारी तेजी से नए इलाकों तक पहुंच सकती है।

बताया जा रहा है कि यह घटना कांगो के इतुरी प्रांत के मोंगबवालू क्षेत्र में हुई, जहां इबोला संदिग्ध मरीजों के इलाज और निगरानी के लिए विशेष केंद्र बनाया गया था। आगजनी के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई मरीज केंद्र छोड़कर भाग निकले। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अविश्वास और असंतोष भी सामने आया है। कुछ समुदायों में संक्रमित लोगों के इलाज, अंतिम संस्कार की प्रक्रियाओं और स्वास्थ्य नियमों को लेकर नाराजगी देखी गई, जिसके कारण तनाव बढ़ा और हिंसक घटनाओं की स्थिति बनी।

इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हालात को बेहद चिंताजनक बताते हुए चेतावनी जारी की है। संगठन के अनुसार, कांगो में इबोला संक्रमण के फैलने का जोखिम “बहुत उच्च” स्तर पर पहुंच गया है। WHO का कहना है कि इस प्रकोप के पीछे बंडीबुग्यो स्ट्रेन जिम्मेदार है, जिसके लिए फिलहाल व्यापक स्तर पर स्वीकृत वैक्सीन और विशेष उपचार सीमित हैं। संगठन ने यह भी चेताया कि कमजोर स्वास्थ्य ढांचा, संघर्ष प्रभावित क्षेत्र, सीमित चिकित्सा संसाधन, लोगों की आवाजाही और अफवाहें संक्रमण को तेजी से फैलाने वाले प्रमुख कारण बन सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए केवल चिकित्सा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि स्थानीय समुदायों का भरोसा जीतना, जागरूकता बढ़ाना और संक्रमित लोगों की समय पर पहचान व निगरानी सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार कांगो प्रशासन के साथ मिलकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं।

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