कूटनीतिक तनाव के बाद पटरी पर लौटे भारत-कनाडा संबंध, CEPA वार्ता में तेजी

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भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) को लेकर बातचीत एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कनाडा दौरे के दौरान संकेत दिया कि दोनों देश इस साल के अंत तक इस समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार अधिकारियों के साथ बैठक के बाद गोयल ने कहा कि भारत और कनाडा केवल व्यापार समझौते तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि आर्थिक साझेदारी को व्यापक और दीर्घकालिक आधार पर मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसे हासिल करने के लिए निवेश, निर्यात और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव का असर व्यापार वार्ताओं पर भी पड़ा था, जिससे CEPA से जुड़ी प्रक्रिया धीमी हो गई थी। हालांकि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ने और उच्चस्तरीय संपर्कों के फिर शुरू होने से रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं। इसी पृष्ठभूमि में व्यापार वार्ता को नई गति दी गई है और दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग के कई क्षेत्रों में संभावनाओं पर चर्चा तेज कर दी है। माना जा रहा है कि राजनीतिक स्तर पर भरोसे की बहाली के साथ व्यापारिक समझौते को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हुआ है।

कनाडा यात्रा के दौरान पीयूष गोयल के साथ भारतीय उद्योग जगत का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी शामिल रहा, जिसमें धातु एवं खनन, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, कृषि, दूरसंचार, फार्मा, कपड़ा, एयरोस्पेस और पर्यटन जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद थे। इस दौरे का उद्देश्य केवल व्यापार समझौते पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि दोनों देशों के बीच निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के अवसर तलाशना भी था। भारत, कनाडा को महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा आपूर्ति के क्षेत्र में संभावित रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है, जबकि कनाडा भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार और तेज आर्थिक वृद्धि को अपने निवेश के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि CEPA तय समयसीमा के भीतर लागू हो जाता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव आ सकता है। समझौते के लागू होने पर कई उत्पादों पर शुल्क कम होने, निवेश बढ़ने, सेवाओं और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होने तथा भारतीय निर्यातकों को कनाडाई बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है। वहीं कनाडाई कंपनियों को भारत में बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर मिल सकते हैं। ऐसे में यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित न रहकर भारत-कनाडा संबंधों को आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

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