पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत अलर्ट, राजनाथ सिंह ने लोगों को किया आश्वस्त

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर गहराते संकट के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और संभावित मूल्य वृद्धि को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इसी बीच रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और खाद (उर्वरक) की आपूर्ति को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में ईंधन और आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार मौजूद है तथा सरकार पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। राजनाथ सिंह ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें और घबराहट में जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने जैसी स्थिति पैदा न करें, क्योंकि इससे सप्लाई सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

सरकार के अनुसार वर्तमान हालात को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर कई स्तरों पर समीक्षा की जा रही है। संबंधित मंत्रालय, तेल कंपनियां और आपूर्ति से जुड़ी एजेंसियां लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं ताकि देश के किसी भी हिस्से में पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस की कमी न होने पाए। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल देश में ईंधन की सप्लाई सामान्य बनी हुई है और पेट्रोल पंपों पर घबराहट में खरीदारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इस क्षेत्र में अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर पड़ने की आशंका बनी रहती है। हालांकि सरकार का दावा है कि उसने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी कर रखी है और देश के पास कई दिनों तक जरूरतें पूरी करने लायक रणनीतिक एवं परिचालन भंडार उपलब्ध हैं।

ईंधन के साथ-साथ खाद की उपलब्धता पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है, क्योंकि पश्चिम एशिया में किसी बड़े संकट का असर उर्वरक आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने संबंधित विभागों को स्थिति पर सतर्क नजर रखने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का दबाव बन सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार का संदेश स्पष्ट है कि देश में ईंधन और खाद की कोई कमी नहीं है और लोगों को किसी प्रकार की घबराहट में आने की आवश्यकता नहीं है।

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