अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि वह इस बात से सहज नहीं हैं कि ईरान का उच्च संवर्धित यूरेनियम रूस या चीन को सौंप दिया जाए। उनके अनुसार, यह अत्यंत संवेदनशील परमाणु सामग्री है और इसका नियंत्रण किसी अन्य बड़ी शक्ति के हाथों में जाना वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए नई चिंताएं पैदा कर सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी संभावित समझौते में ऐसी व्यवस्था चाहता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित रहे और उसका इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए न हो।
दरअसल, हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते, आर्थिक प्रतिबंधों में संभावित राहत और क्षेत्रीय तनाव को कम करने को लेकर बातचीत की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि एक संभावित समझौते के तहत ईरान के संवर्धित यूरेनियम को रूस या चीन जैसे देशों की निगरानी में भेजने का प्रस्ताव विचाराधीन रहा है, ताकि ईरान की परमाणु क्षमता को सीमित किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय निगरानी को मजबूत बनाया जा सके। हालांकि ट्रंप ने इस संभावना को लेकर असहमति जताते हुए कहा कि अमेरिका ऐसी व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सकता, जिसमें इतनी संवेदनशील सामग्री का नियंत्रण किसी अन्य वैश्विक शक्ति को सौंप दिया जाए। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
दूसरी ओर, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा, चिकित्सा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है तथा उसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत यूरेनियम संवर्धन का अधिकार प्राप्त है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सैन्य उपयोग के लिए नहीं है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता इस बात को लेकर बनी हुई है कि उच्च स्तर का यूरेनियम संवर्धन भविष्य में परमाणु हथियार निर्माण की क्षमता को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल रूस और चीन को लेकर अविश्वास का संकेत नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की उस व्यापक रणनीति को भी दर्शाता है जिसके तहत वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रत्यक्ष प्रभाव और निगरानी बनाए रखना चाहता है। ऐसे में ट्रंप की यह टिप्पणी आने वाले समय में अमेरिका-ईरान वार्ता, संभावित परमाणु समझौते और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।



