पहली बार UN निगरानी सूची में इस्राइल और रूस, रिपोर्ट में गंभीर आरोप

SHARE:

संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई वार्षिक रिपोर्ट में इस्राइल और रूस की सुरक्षा एवं सैन्य संस्थाओं को पहली बार संघर्ष क्षेत्रों में कथित यौन हिंसा के आरोपों के आधार पर ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में यौन हिंसा, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार से जुड़े मामलों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, जिसके बाद दोनों देशों की संस्थाओं को निगरानी सूची में रखा गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ओर से जारी इस सूची में उन सरकारी और गैर-सरकारी पक्षों को शामिल किया जाता है जिन पर संघर्ष के दौरान व्यवस्थित रूप से यौन हिंसा करने या उसे बढ़ावा देने के आरोप लगते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्राइली सुरक्षा बलों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ फिलिस्तीनी बंदियों तथा संघर्ष प्रभावित इलाकों में हिरासत के दौरान कथित यौन हिंसा, जबरन नग्नता, अपमानजनक व्यवहार और यौन उत्पीड़न जैसे आरोप दर्ज किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दावा किया कि इन मामलों से जुड़े कई आरोपों का दस्तावेजीकरण किया गया, हालांकि इस्राइल ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे पक्षपातपूर्ण और तथ्यों से परे बताया है। इस्राइली अधिकारियों का कहना है कि देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है और आरोपों को राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।

वहीं रूस की सैन्य और सुरक्षा एजेंसियों को यूक्रेन युद्ध के दौरान कथित यौन हिंसा, हिरासत में लिए गए लोगों और युद्धबंदियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों के कारण सूची में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि संघर्ष के दौरान हिरासत केंद्रों और प्रभावित क्षेत्रों से कई शिकायतें सामने आईं, जिनमें कथित यौन उत्पीड़न और हिंसा के मामले शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि जांच के दौरान कुछ क्षेत्रों तक स्वतंत्र पहुंच सीमित रहने के कारण सभी मामलों की पुष्टि चुनौतीपूर्ण रही।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा वैश्विक स्तर पर एक गंभीर मानवीय और मानवाधिकार संकट बनती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई क्षेत्रों में यौन हिंसा को डर पैदा करने, नियंत्रण स्थापित करने और युद्ध की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस रिपोर्ट को जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है, जबकि इस्राइल सहित कुछ देशों ने रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ब्लैकलिस्ट का उद्देश्य संबंधित पक्षों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना और संघर्ष प्रभावित नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों, की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।

Leave a Comment