वैश्विक निवेशकों को भारत का संदेश, पीयूष गोयल ने अमेरिका में व्यापारिक अवसर गिनाए

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका दौरे के दौरान 50 से अधिक वैश्विक कारोबारी नेताओं, निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, नवाचार तथा सप्लाई चेन सहयोग को और मजबूत करना रहा। अमेरिका में आयोजित विभिन्न कारोबारी संवादों के दौरान पीयूष गोयल ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विनिर्माण क्षमता, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक निवेश के लिए तैयार हो रहे कारोबारी माहौल को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत नीति स्थिरता, व्यापार सुगमता और निवेश के अनुकूल वातावरण के कारण वैश्विक कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बैठकों में भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई गति देने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को अधिक मजबूत और विविध बनाने पर विशेष चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और गहरा करने के लिए विनिर्माण, नवाचार, उच्च तकनीक, ऊर्जा और निवेश सहयोग जैसे क्षेत्रों में अवसरों पर विचार किया गया। कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में यह भी रेखांकित किया गया कि वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक परिदृश्य और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत एक स्थिर और विश्वसनीय बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां दीर्घकालिक निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

इस दौरान भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत सामने आए। पीयूष गोयल ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और व्यापक बनाने के लिए बातचीत जारी है और एक अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। माना जा रहा है कि इस समझौते के जरिए बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश प्रवाह को गति देने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में अहम कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

बैठकों में शामिल कई वैश्विक कंपनियों और निवेशकों ने भारत की आर्थिक संभावनाओं, उत्पादन क्षमताओं और तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार में गहरी रुचि दिखाई। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भारत में निवेश, विनिर्माण विस्तार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव, निवेश के नए अवसरों और आर्थिक विविधीकरण की रणनीतियों के बीच भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकते हैं। पीयूष गोयल की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत वैश्विक निवेश आकर्षित करने, निर्यात बढ़ाने और प्रमुख रणनीतिक साझेदार देशों के साथ आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में सक्रिय प्रयास कर रहा है।

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