भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA/CEPA) लागू होने के साथ ही दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है, जिसे भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के अधिकांश निर्यात उत्पादों को ओमान के बाजार में शुल्क-मुक्त या रियायती पहुंच मिलने लगी है, जिससे भारतीय सामान पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं। सरकार और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इसका लाभ विशेष रूप से कृषि उत्पाद, टेक्सटाइल, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, प्लास्टिक और फार्मा सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को मिल सकता है। यह समझौता भारतीय उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र के लिए निर्यात बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है।
इस समझौते का असर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों पर अधिक दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि ये राज्य विभिन्न निर्यात आधारित उद्योगों के महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं। उत्तर प्रदेश के चमड़ा, खेल सामग्री, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों को ओमान में नए बाजार मिलने की उम्मीद है, जबकि उत्तराखंड के फार्मा, हर्बल और खाद्य उत्पाद उद्योग को लाभ मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वहीं गुजरात, जो पेट्रोकेमिकल्स, केमिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, हीरा उद्योग और समुद्री उत्पादों का बड़ा निर्यातक है, उसके कारोबारियों के लिए ओमान का बाजार अधिक सुलभ और संभावनाओं से भरा साबित हो सकता है। हालांकि सरकार की ओर से राज्यवार लाभार्थियों की विस्तृत सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन उद्योग आधारित विश्लेषण में इन राज्यों को संभावित लाभार्थियों के रूप में देखा जा रहा है।
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता केवल ओमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र (GCC) के अन्य बाजारों तक पहुंच का रास्ता भी आसान बना सकता है। ओमान की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, बंदरगाह और लॉजिस्टिक नेटवर्क भारतीय निर्यातकों को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों तक बेहतर व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। इससे निर्यात लागत कम होने, सामान की आपूर्ति प्रक्रिया तेज होने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए डिजिटल प्रमाणन प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (eCOO) की शुरुआत भी की गई है, जिससे छोटे और मध्यम निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते को भारतीय निर्यातकों, विशेषकर यूपी, उत्तराखंड और गुजरात जैसे निर्यात आधारित राज्यों के लिए नई संभावनाओं और आर्थिक अवसरों का द्वार माना जा रहा है।




