पर्यावरण और पारदर्शिता का मुद्दा: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर कांग्रेस का नया हमला

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अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav को पत्र लिखकर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरियों, पारदर्शिता और पारिस्थितिक प्रभावों से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अध्ययन, निगरानी रिपोर्ट और अनुपालन दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिससे इसकी समीक्षा और निगरानी प्रक्रिया को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं। पार्टी ने मांग की है कि परियोजना से जुड़े सभी प्रमुख दस्तावेजों और रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए ताकि प्रभावित पक्षों और विशेषज्ञों को पूरी जानकारी मिल सके।

अपने पत्र में जयराम रमेश ने यह भी दावा किया है कि परियोजना के लिए तैयार किए गए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अध्ययनों की गुणवत्ता और पर्याप्तता पर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद जिन संरक्षण, पुनर्वास और शमन उपायों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए थी, वे अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आई हैं। कांग्रेस ने छह-मासिक अनुपालन रिपोर्टों, परियोजना निगरानी समिति की बैठकों और पर्यावरणीय शर्तों के पालन से जुड़ी जानकारियों को भी सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि इतनी बड़ी परियोजना के संबंध में पारदर्शिता का अभाव चिंता का विषय है।

ग्रेट निकोबार परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं में शामिल है। इसके तहत एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, नागरिक एवं सैन्य उपयोग वाला हवाई अड्डा, आधुनिक टाउनशिप और ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचे का विकास प्रस्तावित है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में देश की उपस्थिति को नई मजबूती प्रदान करेगी। हालांकि, पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों का कहना है कि परियोजना से वन क्षेत्रों, जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा स्थानीय और आदिवासी समुदायों के अधिकारों तथा आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं। ऐसे में विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों के बीच संतुलन को लेकर ग्रेट निकोबार परियोजना एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है।

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